शनि प्रदोष की कथा | Pradosh ki katha |
शनि प्रदोष की कथा
|| कथा का सार ||
एक समय की बात है, एक अत्यंत निर्धन ब्राह्मण की विधवा पत्नी अपने पुत्र को लेकर भिक्षा मांगने जाया करती थी।
|| राजकुमार से भेंट ||
किएक दिन भिक्षा मांगते समय उसकी भेंट विदर्भ देश के राजकुमार से हुई, जो शत्रुओं द्वारा अपने पिता का राज्य छीन लिए जाने के कारण वन में भटक रहा था।
|| प्रदोष व्रत का प्रभाव ||
ब्राह्मण पुत्र ने उस राजकुमार को शनि प्रदोष व्रत का महत्व बताया और इसे करने की सलाह दी।
|| शुभ परिणाम ||
राजकुमार ने विधि-विधान से शनि प्रदोष का व्रत किया। व्रत के प्रभाव से उसे एक गंधर्व कन्या से विवाह करने का अवसर मिला और उसकी सेना व बल की वृद्धि हुई। अंततः, भगवान शिव और शनि देव की कृपा से उसने अपने शत्रुओं को पराजित कर अपने पिता का राज्य पुनः प्राप्त कर लिया।
इस कथा के अनुसार, जो भी भक्त शनि प्रदोष का व्रत श्रद्धापूर्वक करता है, उसके सभी कष्ट दूर होते हैं और उसे सौभाग्य व ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है |
॥अस्तु ॥
शनि प्रदोष की कथा | Pradosh ki katha |
Reviewed by Bijal Purohit
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8:06 pm
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