गुरुपुष्य नक्षत्र का महत्व | Gurupushya Nakshatra ka Mahatva |


गुरुपुष्य नक्षत्र का महत्व

गुरुपुष्य नक्षत्र का महत्व


गुरु पुष्य नक्षत्र जिसे 'गुरु-पुष्य योग' भी कहा जाता है |

ज्योतिष शास्त्र में अत्यंत शुभ और महत्वपूर्ण माना जाता है।

इसे सभी नक्षत्रों में राजा के समान दर्जा प्राप्त है।

॥ अर्थ ॥

जब गुरुवार के दिन 'पुष्य नक्षत्र' का संयोग बनता है, तब उसे 'गुरु पुष्य नक्षत्र' या 'गुरु पुष्य योग' कहते हैं।

॥महत्व ॥

पुष्य नक्षत्र को 'अमृत योग' माना जाता है। जब यह गुरुवार के साथ मिलता है, तो इसकी शुभता कई गुना बढ़ जाती है।

 शुभ कार्यों के लिए ॥

  • यह योग खरीदारी, नया निवेश, व्यापार शुरू करने, सोना-चांदी खरीदने, भूमि-भवन या वाहन खरीदने के लिए सर्वोत्तम माना जाता है

    ॥ स्थायित्व ॥

    माना जाता है कि इस नक्षत्र में किया गया कार्य लंबे समय तक शुभ फल देता है और जीवन में समृद्धि लाता है।

    || धार्मिक दृष्टिकोण ||

    इस दिन महालक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा करने का विशेष महत्व है, क्योंकि पुष्य नक्षत्र को लक्ष्मी जी का प्रिय नक्षत्र माना जाता है।

गुरु पुष्य नक्षत्र के दौरान लोग अक्सर विशेष पूजा-अर्चना और दान-पुण्य भी करते हैं ताकि घर में सुख-शांति बनी रहे।


|| अस्तु ||

गुरुपुष्य नक्षत्र का महत्व | Gurupushya Nakshatra ka Mahatva | गुरुपुष्य नक्षत्र का महत्व | Gurupushya Nakshatra ka Mahatva | Reviewed by Bijal Purohit on 6:55 am Rating: 5

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