श्राद्ध पक्ष में नौम के श्राद्ध का महत्व | Shraadh pakshme noum ke Shraadh ka mahatva |
श्राद्ध पक्ष में नौम के श्राद्ध का महत्व
हिन्दू धर्म और पितृ पक्ष (श्राद्ध पक्ष) में नवमी तिथि के श्राद्ध का बहुत अधिक और विशिष्ट महत्व माना जाता है। इसे 'माता नवमी' या 'अव्यविनी नवमी' भी कहा जाता है।
मुख्य महत्व एवं मान्यताएँ
माता और सुहागिन स्त्रियों का श्राद्ध
पितृ पक्ष की नवमी तिथि विशेष रूप से परिवार की उन महिलाओं (माता, दादी, परदादी, और अन्य सुहागिन स्त्रियों) के श्राद्ध के लिए समर्पित मानी जाती है जिनका निधन परिवार के जीवित रहते (सधवा या सुहागिन अवस्था में) हुआ हो। इसलिए इसे कई स्थानों पर "मातृ नवमी" भी कहा जाता है।
सौभाग्य और आशीर्वाद की प्राप्ति
इस तिथि पर परिवार की मृत महिलाओं का तर्पण, पिंडदान और ब्राह्मण भोजन कराने से वे अत्यधिक प्रसन्न होती हैं। ऐसा माना जाता है कि इससे परिवार में सुख-शांति,
वंश वृद्धि और अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
विशेष तर्पण (यदि तिथि ज्ञात न हो):यदि किसी परिवार को अपनी कुल की किसी स्त्री (माता, दादी आदि) की मृत्यु की सटीक तिथि याद न हो, तो वे सर्वपितृ अमावस्या के अलावा नवमी तिथि के दिन भी उनका श्राद्ध और तर्पण कर सकते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सभी दिवंगत मातृशक्तियों का स्मरण कर श्राद्ध करने से उनकी आत्मा को तृप्ति मिलती है।
पूजन और श्राद्ध की मुख्य बातें
ब्राह्मण एवं सुहागिन भोजन
इस दिन ब्राह्मणों के साथ-साथ सुहागिन महिलाओं को भोजन कराना और उन्हें सुहाग की सामग्री (लाल चूड़ियाँ, सिंदूर, साड़ी आदि) दान करना बेहद शुभ और फलदायी माना जाता है।
सात्विक भोजन
श्राद्ध के भोजन में लहसुन, प्याज और तामसिक चीजों का प्रयोग वर्जित होता है। खीर-पुरी और पारंपरिक पकवान बनाकर पितरों को भोग लगाया जाता है।
दक्षिण दिशा की ओर मुख
तर्पण करते समय अपना मुख दक्षिण दिशा की ओर रखना चाहिए और काले तिल, कुश व जल से पितरों का स्मरण करना चाहिए।
- || ॐ नमो पितृभ्यो नमः ||
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Reviewed by Bijal Purohit
on
3:08 pm
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