केवड़ा त्रीज़ का महत्व और विधि | Kevada treej ka mahatva or vidhi |
केवड़ा त्रीज़ का महत्व और विधि
केवड़ा तीज (जिसे केवड़ा त्रिज या हरतालिका तीज का ही रूप माना जाता है) मुख्य रूप से गुजरात और पश्चिमी भारत में भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला एक अत्यंत महत्वपूर्ण महिलाओं का व्रत है। यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है।
केवड़ा तीज का महत्व
अखंड सौभाग्य और वैवाहिक सुख
विवाहित महिलाएं अपने पति की दीर्घायु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए यह व्रत रखती हैं।
मनोवांछित वर की प्राप्ति
अविवाहित युवतियां माता पार्वती की तरह आदर्श जीवनसाथी पाने की कामना के साथ विधि-विधान से यह उपवास करती हैं।
|| केवड़ा के फूल का विशेष महत्व ||
पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान शिव की पूजा में केवड़े के फूल का निषेध माना गया है, परंतु केवड़ा तीज एक ऐसा दुर्लभ अवसर है जिसमें शिव-पार्वती की पूजा में विशेष रूप से ताजे केवड़े के फूल अर्पित किए जाते हैं। इसकी सुगंध को भक्ति और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है।
कठिन तपस्या का प्रतीक
- यह पर्व माता पार्वती द्वारा भगवान शिव को पाने के लिए की गई कठोर तपस्या और उनके अटूट प्रेम की याद दिलाता है।
|| केवड़ा तीज की पूजा विधि ||
नित्यकर्म और संकल्प
इस दिन महिलाएं सुबह जल्दी उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर नए वस्त्र (विशेषकर लाल या हरे रंग के) पहनती हैं और निर्जला या फलाहारी व्रत का संकल्प लेती हैं।
मंडप और वेदी की स्थापना
घर के पूजा स्थल या मंदिर को फूलों और रंगोली से सजाया जाता है। एक चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की मिट्टी या रेत से बनी प्रतिमाएं या शिवलिंग स्थापित किया जाता है।
षोडशोपचार पूजन
माता पार्वती को सुहाग की सामग्री (सिंदूर, चूड़ियां, महावर, बिंदी आदि) और श्रृंगार का सामान अर्पित किया जाता है।
केवड़ा अर्पण
भगवान शिव और माता पार्वती को बेलपत्र, धतूरा, ऋतुफल और विशेष रूप से केवड़े का फूल अर्पित किया जाता है।
रात्रि जागरण और कथा
इस दिन महिलाएं पूरे दिन उपवास रखती हैं और रातभर जागकर (जागरण) भजन-कीर्तन करती हैं। पूजा के दौरान 'केवड़ा तीज / हरतालिका व्रत कथा' का पाठ सुना या पढ़ा जाता है।
व्रत का पारण
अगले दिन सुबह स्नान के बाद अंतिम पूजा संपन्न करने और ब्राह्मण को दान-दक्षिणा देने के बाद ही व्रत खोला जाता है |
|| ओम नमः शिवाय ||
केवड़ा त्रीज़ का महत्व और विधि | Kevada treej ka mahatva or vidhi |
Reviewed by Bijal Purohit
on
8:45 am
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