कौनसा श्राद्ध कब करे ? Konsa Shradh kab kare ?


कौनसा श्राद्ध कब करे ?

कौनसा श्राद्ध कब करे ?

हिन्दू पंचांग के अनुसार, श्राद्ध (पितृ पक्ष) मुख्य रूप से हर साल भाद्रपद मास की पूर्णिमा से शुरू होकर आश्विन मास की अमावस्या
(जिसे सर्वपितृ अमावस्या या
महालया भी कहते हैं) तक चलते हैं।

श्राद्ध करने के मुख्य नियम और तिथियां इस प्रकार हैं

|| तथ्य के आधार पर (मृत्यु तिथि) ||

सामान्यतः श्राद्ध उस तिथि को किया जाता है जिस तिथि को पूर्वज (माता-पिता या परिवार के अन्य सदस्य) की मृत्यु हुई हो। उदाहरण के लिए, यदि किसी की मृत्यु आश्विन मास की तृतीया तिथि को हुई हो, तो उनका श्राद्ध पितृ पक्ष की तृतीया तिथि को ही किया जाएगा।

|| पितृ पक्ष की अवधि ||

यह 16 दिनों की अवधि होती है। इस वर्ष (2026 में) पितृ पक्ष 27 सितंबर 2026 से 10 अक्टूबर 2026 तक है।

|| विशेष स्थितियां और तिथियां ||

पंचमी, नवमी या एकादशी
परिवार में जिनकी मृत्यु किसी विशेष परिस्थिति में हुई हो (जैसे अविवाहित, संन्यासी, या जिनकी तिथि ज्ञात न हो),
उनके लिए भी शास्त्रों में कुछ विशेष तिथियां
निर्धारित हैं।

हिन्दू धर्म में पितृ पक्ष (श्राद्ध काल) के दौरान अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और उनकी तृप्ति के लिए श्राद्ध कर्म किए जाते हैं। आइए जानते हैं कि श्राद्ध कब और किस तरह तिथि के अनुसार किए जाते हैं |

  • || श्राद्ध कब करें? (समय और नियम निधन की तिथि के अनुसार ||

    मुख्य रूप से श्राद्ध उस तिथि पर किया जाता है जिस तिथि को पूर्वज (माता-पिता या परिवार के सदस्य) का देहांत हुआ हो (हिन्दू पंचांग की कृष्ण पक्ष की तिथियों के अनुसार)। अंग्रेजी तारीख से मतलब न रखकर हमेशा पंचांग की तिथि देखी जाती है।

  • || कुतुप और अपराह्न काल ||

    श्राद्ध कर्म हमेशा दिन के समय (विशेषकर कुतुप मुहूर्त दोपहर लगभग 11:44 से 12:32 के बीच या अपराह्न काल में) करना सबसे उत्तम माना जाता है। सुबह-सुबह या रात के समय श्राद्ध नहीं किया जाता।

    || यदि तिथि ज्ञात न हो ||

      1. यदि किसी को अपने पूर्वज के देहांत की तिथि याद न हो, तो वे आश्विन कृष्ण पक्ष की सर्वपितृ अमावस्या (महालय अमावस्या) के दिन सभी ज्ञात-अज्ञात पूर्वजों का एक साथ श्राद्ध कर सकते हैं।

      || तिथि के अनुसार श्राद्ध की सूची ||

      पितृ पक्ष में प्रतिपदा से लेकर अमावस्या तक हर तिथि का अपना महत्व है:

      || पूर्णिमा श्राद्ध ||
      जिन परिजनों की मृत्यु पूर्णिमा के दिन हुई हो, उनका श्राद्ध आश्विन पूर्णिमा या भाद्रपद पूर्णिमा को किया जाता है।

      || प्रतिपदा तिथि ||
      इस दिन उन पूर्वजों का श्राद्ध होता है जिनकी मृत्यु प्रतिपदा तिथि को हुई हो।

      || द्वितीया तिथि ||
      द्वितीया को देहांत होने वाले परिजनों के लिए।

      || तृतीया तिथि ||
      तृतीया तिथि के दिन की मृत्यु पर।

      || चतुर्थी और पंचमी तिथि ||
      पंचमी तिथि का श्राद्ध विशेष रूप से उन अविवाहित सदस्यों या कम उम्र में जिनकी मृत्यु हुई हो, उनके लिए किया जाता है।

      || षष्ठी तिथि ||
      षष्ठी तिथि को देहांत होने वालों के लिए।

      • || सप्तमी और अष्टमी तिथि ||
        सप्तमी या अष्टमी तिथि के दिन प्राण छोड़ने वालों का श्राद्ध इन तिथियों पर होता है।

      • || नवमी तिथि (अविधवा नवमी / मातृ नवमी) ||
        यह तिथि सुहागिन महिलाओं (माता, दादी आदि) के श्राद्ध के लिए विशेष मानी जाती है, जिनका निधन उनके पति के जीवित रहते हुआ हो।

        || दशमी तिथि ||
        दशमी तिथि को गति को प्राप्त हुए पूर्वजों के लिए।

        || एकादशी तिथि ||
      • इस दिन संन्यासियों, यतियों या वैराग्य धारण करने वाले पूर्वजों का श्राद्ध किया जाता है।

        || द्वादशी तिथि ||
      • जिन लोगों ने संन्यास लिया हो या जो ईश्वर-आराधना में लीन रहे हों, उनका श्राद्ध द्वादशी पर होता है।

        || त्रयोदशी तिथि ||
      • बच्चों या युवा वर्ग के परिजनों की शांति के लिए और त्रयोदशी का श्राद्ध।

      • || चतुर्दशी तिथि ||
        जिन लोगों की मृत्यु किसी दुर्घटना, हथियार से, आग से या किसी आकस्मिक/अप्राकृतिक (Unnatural) तरीके से हुई हो, उनका श्राद्ध चतुर्दशी तिथि के दिन ही किया जाता है।

      • सर्वपितृ अमावस्या (महालय अमावस्या)
        (10 अक्टूबर 2026)
        यदि आपको अपने किसी पूर्वज की मृत्यु की तिथि याद नहीं है, या किसी कारणवश आप उनकी निश्चित तिथि पर श्राद्ध नहीं कर पाए, तो आप आश्विन अमावस्या यानी सर्वपितृ अमावस्या के दिन सभी ज्ञात-अज्ञात पूर्वजों का श्राद्ध कर सकते हैं। इसे बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।

      • || ॐ नमो पितृभ्यो नमः ||
कौनसा श्राद्ध कब करे ? Konsa Shradh kab kare ? कौनसा श्राद्ध कब करे ? Konsa Shradh kab kare ? Reviewed by Bijal Purohit on 3:12 pm Rating: 5

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