अनंत चतुर्दशी का महत्व और विधि | Anant Chaturdashi ka mahatva aur vidhi |


अनंत चतुर्दशी का महत्व और विधि

अनंत चतुर्दशी का महत्व और विधि

अनंत चतुर्दशी (जिसे अनंत चौदस भी कहा जाता है) हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाने वाली एक अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण तिथि है। इस दिन भगवान विष्णु के 'अनंत रूप' की पूजा की जाती है और पुरुष व महिलाएं अपने बाजू पर रक्षा सूत्र (अनंत सूत्र) बांधते हैं।

|| अनंत चतुर्दशी का महत्व ||

भगवान विष्णु की कृपा

यह व्रत और पर्व जगत के पालनहार भगवान विष्णु को समर्पित है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने से भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

संकटों से मुक्ति

इस दिन बांधा जाने वाला 'अनंत सूत्र' (14 गांठों वाला रेशमी धागा) जीवन के सभी संकटों, कठिनाइयों और दुखों से रक्षा करता है।

गणेश विसर्जन का दिन

यह प्रसिद्ध गणेश उत्सव का अंतिम दिन भी है। इस दिन 10 दिनों तक विराजे गए भगवान गणेश की प्रतिमा का अनंत चतुर्दशी के दिन बड़े धूमधाम से विसर्जन किया जाता है।

महाभारत काल से जुड़ाव

पौराणिक कथाओं के अनुसार, पांडवों ने जुए में अपना सब कुछ हार जाने के बाद भगवान श्रीकृष्ण के बताए अनुसार इस अनंत व्रत को किया था, जिसके प्रभाव से उन्हें उनका खोया हुआ राज्य और वैभव वापस मिला था |

|| अनंत चतुर्दशी की पूजा विधि ||

स्नान और संकल्प

इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

इसके बाद पूजा घर में व्रत और भगवान विष्णु की पूजा का संकल्प लें।

|| कलश स्थापना और पूजा ||

एक पवित्र कलश की स्थापना करें और उस पर कुशा (घास) से बने भगवान विष्णु के अनंत रूप या उनकी मूर्ति/चित्र को स्थापित करें।

भगवान को रोली, अक्षत, पुष्प, धूप-दीप और नैवेद्य (भोग) अर्पित करें।

|| अनंत सूत्र (धागा) की पूजा ||

|| कलश स्थापना और पूजा ||

एक पवित्र कलश की स्थापना करें और उस पर कुशा (घास) से बने भगवान विष्णु के अनंत रूप या उनकी मूर्ति/चित्र को स्थापित करें।

भगवान को रोली, अक्षत, पुष्प, धूप-दीप और नैवेद्य (भोग) अर्पित करें।

|| अनंत सूत्र (धागा) की पूजा ||

सूती या रेशमी धागे में कुमकुम, हल्दी और केसर लगाकर 14 गांठें लगाई जाती हैं, जिसे 'अनंत' कहा जाता है।

इस अनंत सूत्र को भगवान विष्णु के समक्ष रखकर इसकी भी विधिवत पूजा की जाती है।

|| मंत्र जाप और धारण ||

पूजा के दौरान भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप किया जाता है।

पुरुष इसे अपने दाहिने हाथ की भुजा पर और महिलाएं अपने बाएं हाथ की भुजा पर बांधती हैं

|| कथा और ब्राह्मण भोज ||

अनंत चतुर्दशी की व्रत कथा सुनें या पढ़ें।पूजा के बाद ब्राह्मण को भोजन कराएं या दान दें और फिर परिवार के साथ प्रसाद ग्रहण करें।


|| अस्तु ||
अनंत चतुर्दशी का महत्व और विधि | Anant Chaturdashi ka mahatva aur vidhi | अनंत चतुर्दशी का महत्व और विधि | Anant Chaturdashi ka mahatva aur vidhi | Reviewed by Bijal Purohit on 3:30 pm Rating: 5

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