जन्माष्टमी का महत्व और विधि हिंदी में | Janmashtami ka mahatva |
जन्माष्टमी का महत्व और विधि
- सांस्कृतिक एकता और भाईचाराभारत और दुनिया भर में इस पर्व को बिना किसी भेदभाव के सभी लोग मिलकर मनाते हैं। 'दही हांडी' जैसी परंपराएं समाज में एकता, सहयोग और सामूहिक उत्साह की भावना को मजबूत करती हैं।
|| जन्माष्टमी पूजा विधि |
व्रत और सफाई
जन्माष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें। घर और मंदिर की अच्छी तरह साफ-सफाई करें |
मंडप या चौकी सजावट
पूजा स्थल पर एक चौकी पर लाल या पीले रंग का वस्त्र बिछाएं।
मध्यरात्रि (निशिता काल) पूजा
श्री कृष्ण का जन्म रात को 12 बजे हुआ था, इसलिए मुख्य पूजा रात्रि में ही होती है।
पंचामृत स्नान
रात को 12 बजे कन्हैया का जन्मोत्सव मनाते हुए सबसे पहले उन्हें शंख या कटोरी में रखकर दूध, दही, घी, शहद और शर्करा (पंचामृत) से स्नान कराएं, और अंत में गंगाजल से अभिषेक करें।
||श्रृंगार ||
स्नान के बाद बाल गोपाल को नए सुंदर वस्त्र (पीताम्बर) पहनाएं, और मुकुट, बांसुरी, वैजयंती माला, इत्र, कुंडल व चूड़ियां पहनाकर उनका आलौकिक श्रृंगार करें।
भोग अर्पण
भगवान को केसर-चंदन का तिलक लगाएं।
इसके बाद उन्हें माखन-मिश्री, पंजीरी, खीर, मिष्ठान्न और फलों का भोग लगाएं। ध्यान रहे कि भोग में तुलसी का पत्ता अवश्य शामिल करें। आरती और झूला
गाय के घी का दीपक और धूप जलाकर 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करते हुए आरती करें।
इसके बाद बाल गोपाल को पालने (झूले) में बिठाकर प्यार से झूला झुलाएं और "नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की" के जयकारे लगाएं। || जय श्री कृष्ण ||
Reviewed by Bijal Purohit
on
6:10 pm
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