शरद पूर्णिमा का महत्व | Sharad purnima ka mahatva |


शरद पूर्णिमा का महत्व


शरद पूर्णिमा का महत्व


शरद पूर्णिमा (जिसे आश्विन पूर्णिमा या रास पूर्णिमा भी कहा जाता है) हिंदू पंचांग के अनुसार आश्विन मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है। धार्मिक, पौराणिक और वैज्ञानिक दृष्टि से इस दिन का बहुत अधिक महत्व है।

|| धार्मिक और पौराणिक महत्व ||

चंद्रमा की पूर्ण कलाएं

ऐसा माना जाता है कि इस दिन चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है और उसकी किरणों में विशेष प्रकार की अमृत रूपी ऊर्जा बरसाती है।

भगवान कृष्ण का रासलीला उत्सव

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी अद्भुत रात में भगवान श्रीकृष्ण ने महाकाव्यों और गोपियों के साथ महारास रचाया था। इसे भगवान कृष्ण और भक्तों के प्रेम का प्रतीक माना जाता है।

माता लक्ष्मी का आगमन

मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात को माता लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण के लिए निकलती हैं और यह देखती हैं कि कौन जाग रहा है। इसलिए इस रात को 'जागरूकता की रात' या कोजागर पूर्णिमा भी कहते हैं। इस दिन माता लक्ष्मी की विशेष पूजा-अर्चना करने से घर में सुख-समृद्धि और धन का आगमन होता है।

 || स्वास्थ्य और वैज्ञानिक महत्व ||

औषधीय गुण

शरद पूर्णिमा की रात को दूध और चावल की बनी खीर को खुले आसमान के नीचे रखा जाता है। वैज्ञानिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से, इस समय चंद्रमा की किरणें और खुले आसमान की शीतलता मिलकर खीर में औषधीय गुण उत्पन्न करती हैं।

अमृत वर्षा

ऐसा माना जाता है कि इस खीर का सेवन करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) बढ़ती है, पित्त और कफ जैसे विकार शांत होते हैं और शरीर को ऊर्जा मिलती है।


|| जय श्री कृष्ण ||
शरद पूर्णिमा का महत्व | Sharad purnima ka mahatva | शरद पूर्णिमा का महत्व | Sharad purnima ka mahatva | Reviewed by Bijal Purohit on 7:16 pm Rating: 5

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