दशहरा या विज्यादशमी का महत्व | Dashara ya Vijyaadashmi ka mahatva |
दशहरा या विज्यादशमी का महत्व
![]() |
| दशहरा या विज्यादशमी का महत्व |
|| दशहरा या विजयादशमी का महत्व ||
दशहरा (जिसे विजयादशमी भी कहा जाता है) सनातन संस्कृति के सबसे प्रमुख और पवित्र त्योहारों में से एक है। यह पर्व मुख्य रूप से असत्य पर सत्य की और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाने वाला यह त्योहार जीवन में सकारात्मकता, धर्म और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है |
भगवान श्रीराम की रावण पर विजय
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीराम ने लंकापति रावण का वध करके अधर्म का अंत किया था और माता सीता को मुक्त कराया था। इसी विजय की खुशी में यह पर्व मनाया जाता है।
माँ दुर्गा की महिषासुर पर विजय
नवरात्रि के नौ दिनों के बाद दसवें दिन माँ दुर्गा ने महाबली राक्षस महिषासुर का वध किया था। इसलिए यह दिन देवी शक्ति की विजय का भी प्रतीक है।
शस्त्र पूजा
इस पावन दिन पर विशेष रूप से शस्त्रों, वाहनों और औजारों की पूजा करने की प्राचीन परंपरा है। इसे कर्तव्य, रक्षा और वीरता का सम्मान माना जाता है।
- शमी वृक्ष की पूजाविजयादशमी के दिन शमी के पेड़ की पूजा करने का विशेष महत्व है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, महाभारत काल में पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान अपने अस्त्र-शस्त्र इसी पेड़ पर छुपाए थे और विजय प्राप्त करने के बाद उन्हें पुनः प्राप्त किया था।
- रावण दहन का संदेशइस दिन बुराई के प्रतीक रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले जलाए जाते हैं। यह इस बात का प्रतीक है कि अहंकार, लालच और बुराई का नाश निश्चित है।
दशहरा हमें यह सिखाता है कि चाहे परिस्थितियाँ कितनी भी कठिन क्यों न हों, अंततः जीत सच्चाई, धर्म और अच्छाई की ही होती है।
|| जय श्रीराम || || जय माता दी ||
दशहरा या विज्यादशमी का महत्व | Dashara ya Vijyaadashmi ka mahatva |
Reviewed by Bijal Purohit
on
2:11 pm
Rating:
Reviewed by Bijal Purohit
on
2:11 pm
Rating:

कोई टिप्पणी नहीं: