शरद पूर्णिमा को जागरूकता की रात' या कोजागर पूर्णिमा क्यू कहा जाता है ? Sharad purnima ko kojagari purnima kyu kaha jata hai ?
शरद पूर्णिमा को जागरूकता की रात' या कोजागर पूर्णिमा क्यू कहा जाता है ?
शरद पूर्णिमा को 'जागरूकता की रात' और 'कोजागर पूर्णिमा' (कोजागरी पूर्णिमा) कहे जाने के पीछे एक बहुत ही सुंदर धार्मिक और आध्यात्मिक कारण है।
|| कोजागर शब्द का अर्थ ||
'कोजागर' शब्द संस्कृत के दो शब्दों से मिलकर बना है: "को + जागर्ति" जिसका अर्थ होता है— "कौन जाग रहा है?"
|| माता लक्ष्मी का पृथ्वी भ्रमण ||
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार
महालक्ष्मी का आगमन
आश्विन मास की इस पूर्णिमा की मध्यरात्रि में माता लक्ष्मी पृथ्वी लोक पर भ्रमण के लिए आती हैं।
'को जागर्ति' का प्रश्न
वे घर-घर जाकर देखती हैं कि कौन सा भक्त जागकर भगवान और भक्ति में लीन है, और पूछती हैं— "को जागर्ति?" (कौन जाग रहा है?)।
सुख-समृद्धि का आशीर्वाद
जो भक्त इस रात आलस्य त्यागकर जागते हैं और माता लक्ष्मी व भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना या संकीर्तन करते हैं, माता लक्ष्मी उन पर प्रसन्न होकर उन्हें धन, सुख और आरोग्य का वरदान देती हैं।
'जागरूकता' का महत्व
इस रात को जागरूकता की रात कहे जाने के पीछे केवल शारीरिक रूप से जगना ही कारण नहीं है, बल्कि आध्यात्मिक कारण भी हैं |
अमृतमयी ऊर्जा को ग्रहण करना
इस रात चंद्रमा अपनी पूर्ण 16 कलाओं से युक्त होकर अमृत रूपी किरणें बरसाता है। इस ऊर्जा का लाभ उठाने के लिए मन और आत्मा का सचेत (जागरूक) होना आवश्यक है।
अज्ञानता के अंधकार को दूर करना
इस रात भक्ति, ध्यान और दीप प्रज्वलन के माध्यम से जीवन से अज्ञान रूपी अंधकार को मिटाकर ज्ञान और समृद्धि के प्रति जागरूक होने का संदेश दिया जाता है।
|| जय श्री कृष्णा ||
शरद पूर्णिमा को जागरूकता की रात' या कोजागर पूर्णिमा क्यू कहा जाता है ? Sharad purnima ko kojagari purnima kyu kaha jata hai ?
Reviewed by Bijal Purohit
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7:47 pm
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