तेरस के श्राद्ध का महत्व | Teras ke shradh ka mahatva |


तेरस के श्राद्ध का महत्व

तेरस के श्राद्ध का महत्व


पितृ पक्ष में तेरस (त्रयोदशी तिथि) के श्राद्ध का विशेष और अनूठा महत्व है। सनातन धर्म में त्रयोदशी तिथि को भगवान शिव और पितरों दोनों की आराधना के लिए बहुत ही फलदायी माना जाता है।

तेरस के श्राद्ध का महत्व और विशेषताएँ इस प्रकार हैं |

त्रयोदशी तिथि और भगवान शिव का संबंध
महत्व
हिंदू पंचांग के अनुसार त्रयोदशी तिथि भगवान शिव को समर्पित होती है। इस दिन श्राद्ध करने से पितरों को भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है, जिससे उनकी आत्मा को मोक्ष और परम शांति मिलती है।

अकाल मृत्यु या दुर्घटना का शिकार हुए लोगों का श्राद्ध
महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जिन लोगों की मृत्यु किसी दुर्घटना, शस्त्र घात या अकाल मृत्यु (अचानक किसी आपदा आदि से) हुई हो, उनका श्राद्ध त्रयोदशी तिथि के दिन करने का विधान है। ऐसा करने से उनकी भटकती आत्मा को शांति और सद्गति मिलती है।

  • लंबी आयु, आरोग्य और आरोग्यता की प्राप्ति
    महत्व
    इस तिथि पर श्राद्ध करने से परिवार के सदस्यों की आयु लंबी होती है, स्वास्थ्य बेहतर रहता है और घर से बीमारियाँ दूर होती हैं। पितरों के आशीर्वाद से वंश में आरोग्यता बनी रहती है।

    संतान और वंश की वृद्धि
    महत्व
    त्रयोदशी का श्राद्ध करने से पितृ अत्यंत प्रसन्न होते हैं, जिससे कुल की वृद्धि होती है, परिवार में वंश आगे बढ़ता है और संतान संबंधी बाधाएँ दूर होती हैं।
  • ध्यान रखने योग्य मुख्य बातेंब्राह्मण और गौ ग्रास

    इस दिन योग्य ब्राह्मणों को भोजन कराना, अन्न-वस्त्र का दान देना और गाय, कुत्ते तथा कौवे को भोजन (पंचबलि) निकालना अत्यंत शुभ माना जाता है।

  • तर्पण 
    दोपहर के समय कुश, काले तिल और जल से पितरों का स्मरण करते हुए तर्पण करना चाहिए।


    || ॐ नमो पितृभ्यो नमः ||
तेरस के श्राद्ध का महत्व | Teras ke shradh ka mahatva | तेरस के श्राद्ध का महत्व | Teras ke shradh ka mahatva | Reviewed by Bijal Purohit on 3:05 pm Rating: 5

कोई टिप्पणी नहीं:

Blogger द्वारा संचालित.