शीतला सातम का महत्व | Sheetala Satam ka mahatva |
शीतला सातम का महत्व
शीतला सातम का पर्व हिंदू धर्म में स्वास्थ्य, स्वच्छता चेचक जैसे संक्रामक रोगों से रक्षा के लिए समर्पित है। यह मुख्य रूप से गुजरात, राजस्थान और उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। यह त्योहार श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को आता है ।
शीतला सातम का महत्व
|| शीतला माता की पूजा और आरोग्य की प्राप्ति ||
शीतला शब्द का अर्थ है, जो ठंडक या शीतलता प्रदान करे | मान्यता है कि शीतला माता की आराधना करने से बच्चों और परिवार के सदस्यों को चेचक (Smallpox), खसरा (Measles), फोड़े-फुंसियों और अन्य उष्णता (गर्मी) जनित रोगों से मुक्ति मिलती है। माता को चेचक और चर्म रोगों की रक्षिका देवी माना गया है।
|| स्वास्थ्य और स्वच्छता का संदेश ||
शीतला माता का स्वरूप हमें स्वच्छता का संदेश देता है। उनके हाथों में झाड़ू और कलश होता है, जो इस बात का प्रतीक है कि हमें अपने आसपास साफ-सफाई रखनी चाहिए ताकि बीमारियां न फैलें। उनके वाहन गधे को भी स्वच्छता और सादगी से जोड़ा जाता है।
|| बासी और ठंडे भोजन की परंपरा (रानधन छठ और सातम) ||
इस त्योहार से एक दिन पहले 'रानधन छठ' के दिन घरों में चूल्हे पर भोजन पका लिया जाता है। शीतला सातम के दिन घरों में ताजा खाना नहीं पकाया जाता और चूल्हा नहीं जलाया जाता है; बल्कि परिवार के लोग एक दिन पहले का बना हुआ (बासी) या ठंडा भोजन ही खाते हैं। इसके पीछे यह वैज्ञानिक और पारंपरिक मान्यता है कि यह मौसम परिवर्तन के समय शरीर की पाचन अग्नि को संतुलित रखता है और पेट संबंधी समस्याओं से बचाता है।
|| मौसम के बदलाव का संतुलन ||
यह पर्व ऐसे समय पर आता है जब ऋतु परिवर्तन होता है। ग्रीष्म या उमस भरे मौसम में खान-पान और शरीर को शीतलता देने के लिए यह व्रत बहुत उपयोगी माना गया है। महिलाएं विशेष तौर पर अपने संतानों की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन के लिए यह व्रत रखती हैं।
|| पर्यावरण और प्रकृति प्रेम ||
इस दिन नीम के पेड़ों की पूजा भी की जाती है क्योंकि नीम को औषधीय गुणों से भरपूर माना गया है जो कई प्रकार के संक्रमणों को दूर रखता है |
|| शुभ शीतला सातम ||
शीतला सातम का महत्व | Sheetala Satam ka mahatva |
Reviewed by Bijal Purohit
on
4:59 pm
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