पवित्रा एकादशी का महत्व और विधि | Pavitra Ekadashi ka mahatva aur vidhi |
पवित्रा एकादशी का महत्व और विधि
पवित्रा एकादशी (जिसे श्रावण पुत्रदा एकादशी भी कहा जाता है) सनातन धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह व्रत मुख्य रूप से जगत के पालनहार भगवान श्री विष्णु को समर्पित है |
|| पवित्रा एकादशी का महत्व ||
संतान सुख की प्राप्ति
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यह व्रत विशेष रूप से निस्संतान दंपतियों के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है। इसे करने से योग्य और आज्ञाकारी संतान की प्राप्ति होती है।
पापों का नाश
इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति के पूर्व जन्म के और वर्तमान जीवन के कई पाप नष्ट हो जाते हैं तथा अंत में मोक्ष की प्राप्ति होती है।
पुष्टिमार्ग में विशेष महत्व
पुष्टिमार्ग संप्रदाय में इस तिथि का ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व है, क्योंकि इसी दिन महाप्रभु श्री वल्लभाचार्य को भगवान श्रीकृष्ण द्वारा ब्रह्मसंबंद का उपदेश प्राप्त हुआ था।
|| पवित्रा एकादशी की पूजा विधि ||
इस व्रत को विधि-विधान से करने पर ही पूर्ण फल की प्राप्ति होती है |
ब्रह्म मुहूर्त में स्नान
एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। संभव हो तो पवित्र नदियों में स्नान करें अन्यथा घर के जल में ही गंगा जल मिलाकर स्नान करें। इसके बाद स्वच्छ पीले वस्त्र धारण करें।
संकल्प और पूजा की तैयारी
भगवान विष्णु के समक्ष दीप प्रज्वलित करें। व्रत का संकल्प लें।
भगवान विष्णु का श्रृंगार और भोग
श्रीहरि को पीले वस्त्र, पीले फूल, अक्षत, नैवेद्य और ऋतुफल अर्पित करें। भगवान को तुलसी दलअवश्य अर्पित करें, क्योंकि इसके बिना उनकी पूजा अधूरी मानी जाती है।
मंत्र जाप और कथा
पूजा के दौरान "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का 108 बार तुलसी की माला से जाप करें। इसके बाद विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें और पवित्रा एकादशी की व्रत कथा सुनें या पढ़ें।
दान-पुण्य
इस दिन सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या फल का दान करना बेहद शुभ और पुण्यदायी माना गया है।
व्रत का पारण
एकादशी का व्रत अगले दिन (द्वादशी तिथि को) शुभ मुहूर्त में अन्न या जल ग्रहण करके खोला जाता है।
|| ओम नमो भगवते वासुदेवाय ||
पवित्रा एकादशी का महत्व और विधि | Pavitra Ekadashi ka mahatva aur vidhi |
Reviewed by Bijal Purohit
on
6:24 pm
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