रांधण छट का महत्व और विधि हिंदी में | Randhan chat ka mahatva aur vidhi in hindu |
रांधण छट का महत्व और विधि हिंदी में
रांधण छट (जिसे रांधण छठ या शीतला छठ भी कहा जाता है)
मुख्य रूप से गुजरात, राजस्थान और उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में मनाया जाने वाला एक पारंपरिक पर्व है। यह पर्व मुख्य रूप से शीतला सप्तमी और जन्माष्टमी से जुड़ा हुआ है।
॥ रांधण छट का महत्व ॥
स्वास्थ्य और आरोग्यता
यह व्रत मुख्य रूप से माता शीतला को समर्पित है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन और इसके अगले दिन (शीतला सप्तमी/अष्टमी) चूल्हा न जलाने से घर में शीतलता बनी रहती है और बच्चों व परिवार के सदस्यों को चेचक, खसरा, पेट के रोग और गर्मी से होने वाली बीमारियों से रक्षा मिलती है।
पारंपरिक पकवान
इस दिन महिलाएं विभिन्न प्रकार के ठंडे पकवान, मिठाइयां और नमकीन चीजें बनाती हैं। अगले दिन यानी शीतला सप्तमी के दिन इन बासी (ठंडे) व्यंजनों का ही भोग लगाया जाता है और परिवार के सभी सदस्य इन्हें प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं।
स्वास्थ्य वैज्ञानिक दृष्टिकोण
आयुर्वेद और पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, ऋतु परिवर्तन के समय खान-पान में संयम रखना और बासी/सात्विक भोजन करना पाचन तंत्र को मजबूत करता है।
- ॥ रांधण छट की पूजा और भोजन बनाने की विधि ॥एक दिन पहले तैयारीरांधण छट के दिन (यानी सप्तमी से एक दिन पहले) महिलाएं सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करती हैं।
- चूल्हे की पूजा
- इस दिन भोजन बनाने से पहले रसोई के चूल्हे की पूजा की जाती है, क्योंकि इसके अगले दिन यानी शीतला सप्तमी के दिन घर में चूल्हा नहीं जलाया जाता है। चूल्हे पर रोली, चावल, हल्दी और जल चढ़ाकर उसकी आरती की जाती है।पकवान बनाना
- इस दिन घर में विशेष रूप से ऐसे पकवान बनाए जाते हैं जो एक-दो दिन तक खराब न हों और जिन्हें ठंडा ही खाया जा सके, जैसे:पूरी और कचौरी
- खीर, लापसी या चूरमा
- बेसन की गट्टे की सब्जी या सूखे आलू की सब्जी
- विभिन्न प्रकार की नमकीन और मिठाइयां
- शीतला माता को भोग
- रांधण छट पर बनाए गए इन सभी व्यंजनों को अगले दिन (सप्तमी को) सुबह स्नान करने के बाद माता शीतला को अर्पित किया जाता है। इसके बाद परिवार के सभी लोग ठंडा भोजन ही करते हैं।॥ अस्तु ॥
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Reviewed by Bijal Purohit
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1:43 am
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