अषाढ़ी षष्ठी का महत्व और कथा | Ashadhi Shashthi ka mahatva aur katha in hindi |
अषाढ़ी षष्ठी का महत्व और कथा हिंदी में
शायद यहाँ थोड़ी गलतफहमी हुई है। हिंदू पंचांग के अनुसार 'आषाढ़' मास में तिथियां चलती हैं, जिसमें 'आषाढ़ी एकादशी' (शुक्ल पक्ष की एकादशी) अत्यंत प्रसिद्ध है। "आषाढ़ी 6" (आषाढ़ शुक्ल षष्ठी) का भी अपना विशेष धार्मिक महत्व है, जिसे 'स्कंद षष्ठी' या 'कुमार षष्ठी'के रूप में जाना जाता है।
यहाँ आषाढ़ शुक्ल षष्ठी (आषाढ़ी 6) का महत्व और पौराणिक कथा दी गई है |
|| आषाढ़ शुक्ल षष्ठी (स्कंद षष्ठी) का महत्व ||
भगवान कार्तिकेय की पूजा - यह तिथि भगवान शिव और माता पार्वती के ज्येष्ठ पुत्र, देवताओं के सेनापति भगवान कार्तिकेय (स्कंद/मुरुगन) को समर्पित है।
शत्रुओं पर विजय - भगवान कार्तिकेय साहस, शक्ति और विजय के प्रतीक हैं। इस दिन उनकी पूजा करने से व्यक्ति के भीतर आत्मविश्वास बढ़ता है और उसे अपने शत्रुओं तथा नकारात्मकता पर विजय प्राप्त होती है।
मनोकामना पूर्ति - मान्यता है कि जो भक्त इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत रखते हैं, उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और संतान संबंधी समस्याएं दूर होती हैं।
अध्यात्मिक बल - स्कंद षष्ठी का व्रत करने से व्यक्ति को मानसिक शांति और शारीरिक बल की प्राप्ति होती है।
|| पौराणिक कथा ||
स्कंद षष्ठी की कथा मुख्य रूप से तारकासुर के वध से जुड़ी है |
पौराणिक कथा के अनुसार, तारकासुर नामक एक शक्तिशाली राक्षस ने कठोर तपस्या करके ब्रह्मा जी से अमर होने का वरदान माँगा। ब्रह्मा जी ने कहा कि मृत्यु निश्चित है। तब तारकासुर ने वरदान माँगा कि उसकी मृत्यु केवल भगवान शिव के पुत्र के हाथों ही हो। उसे विश्वास था कि शिव जी कभी विवाह नहीं करेंगे, इसलिए वह अमर हो जाएगा।
तारकासुर के अत्याचारों से जब तीनों लोक त्रस्त हो गए, तब देवताओं ने भगवान शिव की स्तुति की। भगवान शिव और माता पार्वती के मिलन से कार्तिकेय (स्कंद) का जन्म हुआ। कार्तिकेय ने बाल्यकाल में ही देवताओं की सेना का नेतृत्व संभाला।
आषाढ़ शुक्ल षष्ठी के ही दिन भगवान कार्तिकेय ने तारकासुर जैसे भयंकर राक्षस का वध करके देवताओं को भयमुक्त किया था। तभी से इस तिथि को 'स्कंद षष्ठी' के रूप में मनाया जाने लगा और भक्त भगवान कार्तिकेय से शक्ति और विजय का आशीर्वाद मांगते हैं।
|| विशेष ||
दक्षिण भारत में इस दिन को बहुत बड़े उत्सव के रूप में मनाया जाता है, जहाँ भगवान कार्तिकेय को 'मुरुगन' के रूप में पूजते हैं। यदि आप दक्षिण भारत में हैं या वहां की परंपराओं को मानते हैं, तो इस दिन का महत्व और भी बढ़ जाता है।
|| जय माताजी ||
Reviewed by Bijal Purohit
on
12:30 pm
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