योगिनी एकादशी व्रत, विधि और महत्व | Yogini Ekadashi Vrat, Vidhi or Mahatva |


योगिनी एकादशी व्रत, विधि और महत्व

योगिनी एकादशी व्रत, विधि और महत्व




|| योगिनी एकादशी क्या है? ||

योगिनी एकादशी आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। यह एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित है। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, यह व्रत साधक के सभी पापों से मुक्ति दिलाकर उसे मोक्ष की ओर ले जाने में सहायक माना जाता है।

|| योगिनी एकादशी व्रत का महत्व ||

पुराणों के अनुसार, योगिनी एकादशी का व्रत अत्यंत फलदाई माना जाता है। इस व्रत का महत्व 88,000 ब्राह्मणों को भोजन कराने के बराबर बताया गया है। इस व्रत को करने से साधक को अनेक लाभ प्राप्त होते हैं |

पापों से मुक्ति

यह व्रत जाने-अनजाने में हुए सभी पापों से मुक्ति दिलाने में सहायक है।

शारीरिक रोगों से मुक्ति

मान्यता है कि योगिनी एकादशी का व्रत करने से शारीरिक रोगों से मुक्ति मिलती है और स्वास्थ्य में सुधार होता है।

|| सुख-समृद्धि की प्राप्ति ||

इस व्रत के प्रभाव से साधक को जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

|| मोक्ष की प्राप्ति ||

इस व्रत का उद्देश्य साधक को जन्म-मरण के बंधन से मुक्त कराकर मोक्ष प्रदान करना है।

योगिनी एकादशी की पूजा विधि योगिनी एकादशी की पूजा विधि अन्य एकादशियों की तरह ही होती है:

|| संकल्प ||

एकादशी के एक दिन पूर्व (दशमी तिथि) से ही सात्विक भोजन करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें।

|| प्रातः स्नान ||

एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

|| पूजन ||

भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र के सामने बैठकर व्रत का संकल्प लें। भगवान को पीले फूल, फल, धूप, दीप, और तुलसी दल अर्पित करें।

|| मंत्र जाप ||

पूरे दिन 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करें।

|| व्रत कथा ||

शाम के समय भगवान विष्णु की आरती करें और योगिनी एकादशी व्रत कथा का पाठ या श्रवण करें।

  1. || जागरण ||

  2. संभव हो तो रात्रि में भगवान के भजन-कीर्तन में जागरण करें।

    || पारण ||

    अगले दिन (द्वादशी तिथि) ब्राह्मणों को दान-दक्षिणा देने और भोजन कराने के बाद ही व्रत का पारण (व्रत खोलना) करें।

|| व्रत के दौरान ध्यान रखने योग्य बातें (नियम) ||

योगिनी एकादशी के दौरान कुछ विशेष नियमों का पालन करना अनिवार्य है:

|| वर्जित खाद्य ||

एकादशी के दिन चावल का सेवन पूर्णतः वर्जित है। इसके अलावा, लहसुन, प्याज, मांस और मदिरा का सेवन भी न करें।

|| तुलसी ||

एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए।

|| आचरण ||

मन में क्रोध, ईर्ष्या या किसी के प्रति बुरा भाव न रखें। सात्विक रहें और वाद-विवाद से बचें।

|| आहार ||

व्रत में केवल फलाहार (फल, दूध, दही, सूखे मेवे) का ही सेवन करें। यदि स्वास्थ्य अनुमति दे, तो निर्जल व्रत भी रखा जा सकता है |


|| ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ||

योगिनी एकादशी व्रत, विधि और महत्व | Yogini Ekadashi Vrat, Vidhi or Mahatva | योगिनी एकादशी व्रत, विधि और महत्व | Yogini Ekadashi Vrat, Vidhi or Mahatva | Reviewed by Bijal Purohit on 3:14 pm Rating: 5

कोई टिप्पणी नहीं:

Blogger द्वारा संचालित.